अभिनेता का स्पेस : पुंज प्रकाश
अमितेश कुमार से हुई लंबी बातचीत का एक अंश उनके ब्लॉग रंगविमर्श से साभार एक अभिनेता के लिए स्पेस का अर्थ समझने के लिए सबसे पहले हमें इसे कई भागों में बांटना पड़ेगा। जिसका सीधा अर्थ ये है कि केवल नाट्य...
View Articleअब मुझे कोई लंबी उम्र की दुआ मत दो | - जोहरा सहगल
पुंज प्रकाश वर्तमान में ओड़िशी नृत्यांगना बेटी किरण सहगल के साथ दिल्ली में रहने वाली जोहरा सहगल रंगकर्मियों में जोहरा आपा के नाम से प्रसिद्ध हैं । शायद ही कोई ऐसा शख्स हो जो उनसे मिला हो या उन्हें कहीं...
View Articleएके हंगल : खतरनाक है ये सन्नाटा.
पुंज प्रकाशस्वतंत्रता सेनानी और रंगमंच व सिनेमा के यथार्थवादी अभिनय शैली के बेहतरीन अदाकार अवतार कृष्ण हंगल ( ए. के. हंगल ) का निधन 25 अगस्त2012 को हो गया. हंगल2007 से गंभीर रूप सेबीमार चल रहे थे,...
View Article.....एक और भीख मांगता अभिनेता
यह आलेख अख़बारों की कतरनों पर आधारित है सो असली लेखक उन पत्रकारों को ही माना जाना चाहिए, जिनके काम पर कई समाचार एजेंसियां माल कम रहीं हैं | हाँ हमारी तरफ़ से कड़ियों को जोड़ने के लिए कुछ मौलिक पक्तियां...
View Articleभारतीय रंगमंच एवं कला उर्फ़ कोई मालामाल तो कोई कंगाल : पुंज प्रकाश
कला, कला के लिए या कला समाज के लिए ? सवाल पुराना है पर उससे भी पुराना पड़ चुका है इस सवाल का जवाब | मनोरंजन के क्षेत्र में आई क्रांति ने जहाँ कला, कला के लिए के समीकरण को चुनौती दे डाली, वहीँ कला को...
View Articleकितनी डर्टी है सिल्क स्मिता और कितने मासूम हैं हम
पुंज प्रकाश सिल्क स्मिता वर्तमान व्यवस्था में जब कोई भी कला माध्यम अपने आप को एक उद्योग के रूप में ढाल लेता है तो जहाँ एक तरफ उसके आर्थिक रूप से अपने पैरों पर खड़े होने की संभावना प्रखर हो जाती है वहीँ...
View Articleजेब भले खाली थी, उसके खयालों में कंगाली नहीं थी!
शशिभूषण आज से ठीक दो साल पहले (चार नवम्बर दो हज़ार नौ ) सुबह के लगभग ग्यारह बजे शशि भूषण ने किडनी चोरी की वजह से विख्यात हुए नोएडा मेडिकल सेंटर अस्पताल में मेरी आँखों के सामने आपनी अंतिम सांसें भरी...
View Articleबकर-शास्त्र का संछिप्त घोषणापत्र : पुंज प्रकाश
सर्वप्रथम इस बात की घोषणा कर देना अहम् है कि यह व्यक्ति केंद्रित शास्त्र है, यहाँ व्यक्ति का महत्व किसी भी अन्य वाद से कहीं अधिक है | अब इस प्रश्न का निवारण करना अति-आवश्यक प्रतीत होता है कि संछिप्त...
View Articleअख़बार पोषित पोर्नोग्राफी, ठगी और अंधविश्वास.
पुंज प्रकाश अखबार आज मानव जीवन का एक महत्वपूर्ण अंग बन चुका है. खास तौर पर नगरों, कस्बों और महानगरों के बारे में तो ये बात कही ही जा सकती है. बिना अखबार के दिन की शुरुआ़त ज़रा मुश्किल ही है. अखबार आज...
View ArticleLet’s play हिंदी हिंदी.
पुंज प्रकाश हिंदीतुम्हारीमातृभाषाहै! परमेरेघरऔरगाँवमेंतोमगहीबोलीजातीहै.इसशब्दकाउच्चारणऐसेकरो! हमबचपनसेतोऐसेहीबोलतेआयेंहैं. अरेयारतुम्हारीहिंदीमेंबिहारीटचआताहै! तोकहाँकाटचआनाचाहिएसर?...
View Articleसंसद का मानसून सत्र उर्फ़ आओ सखी चोर सिपाही खेलें.
पुंज प्रकाश ‘ भ्रष्टाचार भारतीय जन जीवन का हिस्सा बन चुका है. अब घूस को ' सेवा शुल्क ' के रूप में मान्यता दे देनी चाहिए’. - सुप्रीम कोर्ट की एक व्यंगात्मक टिपण्णी. जिस मुल्क की नीति ही निजीकरण केंद्रित...
View Articleलहरें गिनकर माल बनाते हैं साहेब !
पुंज प्रकाशएक कहानी है. बचपन में सुनी थी. किसी मुल्क का एक कारकून घूसखोर हो गया. राजा बड़ा परेशान हुआ कि इसका क्या किया जाय. उसे जहाँ भी लगाये वो वहीं घूसखोरी शुरू कर देता. राजा उसे निकाल सकता नहीं था...
View Articleअंधायुग में भी जीवित रहेगा सत्य
- पुंज प्रकाशहिंदी नाटकों का प्रतिनिधि नाटक है अंधायुग । जिसे पढ़ने , सुनने और देखने का अपना एक अलग ही महत्व और आनंद है । जिस प्रकार कोई भी नाटक प्रेमी इस नाटक के प्रति अपना मोह प्रकट किये बिना नहीं रह...
View Articleसब कुछ कभी कहा नहीं जायेगा.
गतदिनोंबिरसाकृषिविश्विद्यालय, राँचीकेसेंटरललाइब्रेरीमेंकुछवक्तबितानेकामौकामिला. खूबसारीकृषिविज्ञानकीकिताबें, खूबसारीजगह, सुन्दरऔरशांतिपूर्णप्राकृतिकवातावरण. हरियालीकेसाथबगलमेंबहतीजुमारनदी....
View Articleरामचरण निर्मलकर को जानते हैं आप?
रामचरण निर्मलकर देश में लाखों टन सड़ते अनाजों, काले धन, सट्टेबाज़ी और पागलपन भरा आईपीएल क्रिकेट और बेवजह के कार्टून विवाद में समय बर्बाद करते संसद के बीच ये पूछना एकदम ही बकवास है कि रामचरण निर्मलकर...
View Articleरंगविमर्श के सात सौ तीस दिन के बहाने
पुंज प्रकाशवर्चुअल स्पेस पर रंगमंच और सम्बंधित कला के बारे में संवाद व रंगमंच के दस्तावेज, विमर्श, संस्मरण, रंग समीक्षा आदि उपलब्ध करा सकने के संकल्प के साथ शुरू हुआ ब्लॉग ‘रंगविमर्श’ आज सात सौ तीस...
View Articleसंवेदनाएं, सफलता, असफलता, बीमारियों का बाज़ार.
पुंजप्रकाशसमाजआजविज्ञापनोंसेघिराहै, हरचीज़आजविज्ञापनकेदायरेमेंहै. होडिंग, पंफलेट, पोस्टर, बैनर, समाचारपत्र, पत्रिकाएं, इंटरनेट, रेडियो, टेलिविज़नआदिके मार्फ़त विज्ञापनोंसमाजतकपहुंचतेंहैं....
View Articleअंक के मंच पर दिनेश ठाकुर
गत 20 सितम्बर 2012 को गुर्दे में आई खराबी के कारण जाने माने रंगकर्मी व मुंबई स्थित नाट्य दल अंक के संस्थापक 65 वर्षीय दिनेश ठाकुर का निधन हो गया. जीवन में कुछ चीज़ें ऐसी होतीं हैं जिनका सीधा-सीधा कोई...
View Articleइरोम चानू शर्मिला : 12 साल का अनशन.
भारतीय संविधान की एक धारा के तहत किसी भी व्यक्ति को एक साल से ज़्यादा समय तक न्यायिक हिरासत में नहीं रखा जा सकता. तो एक साल पूरा होते ही इरोम चानू शर्मिला को रिहा कर दिया जाता है और पुनः गिरफ्तार कर...
View Articleहत्या और आत्महत्या के बीच मस्तराम बनके ज़िंदगी के दिन गुज़ार दो !
सीताराम शास्त्री Who says it failed? You or him? The movement was not a failure. Rather, the society failed. The literature failed. They failed to understand us. But that doesn’t matter at all. If...
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